Explore captivating content and diverse perspectives on our Discover page. Uncover fresh ideas and engage in meaningful conversations
प्रेम.... महज़ इत्तेफ़ाक़...
प्रेम कभी उन लोगों को क्यों नहीं मिलता जो भरे हैं प्रेम से
प्रेम सदैव एक रिक्तितता बनकर रह जाता है प्रेम के भूखे लोगो के लिए..
वो ही लोग उपेक्षित हैं जो सबसे ज्यादा हक़दार हैं प्रेम के
वो ..जिन्होंने प्रेम को ईश्वर माना वो सबसे ज्यादा छले गए अपने ईश्वर के हाथों
प्रेम ने ना सिर्फ श्रद्धा का नाश किया
प्रेम अक्सर आवरण में घृणित कर्म लगता है क्रुद्ध प्रेमियों को
पर फिर भी प्रेम अभाव कभी खत्म नहीं कर पाया मनुष्य में से मनुष्यत्व
वे सबसे ज्यादा समर्पित रहे प्रेम के प्रति
यानी घृणा, छल, व उपेक्षा मिलकर भी समाप्त नहीं कर सकते प्रेम की बूंद मात्र को भी..
सम्भोग ही जीवन का सत्य हैं.एक औरत कितनी प्यासी और कितनी कामवासनाओं से भारी पूरी है।
एक औरत अपने मन के अश्लील और कामुक विचार को सिर्फ बिस्तर पर किसी मर्द की बाहों में लिपट कर आपने अदाओं से व्यक्त करती है।
जो मर्द उसकी इन अदाओ को समझ जाता है
सिर्फ वही मर्द चरमसुख पाने का हकदार होता
हम राही
Suhana Safar